HAPPINESS NOW, ILLNESS NEVER

I Love What I Feed My Body

If you are happy, you are healthy.

If you are not happy, being healthy is immaterial.

Happiness Now, Illness Never

खाणो, शरीर अर गौरव: जींदा रहण नै एक प्रेम-पाती 🌿

म्हैं खाणै सूं प्रेम करूं हूं, अर खाणो म्हां सूं प्रेम करै है। म्हैं आपरे शरीर सूं प्रेम करूं हूं, अर म्हारो शरीर म्हां सूं प्रेम करै है। यो कदे बदल्यो कोनी, कदे बदलसी कोनी, कदे बदल सकै ई कोनी। म्हारो शरीर घणी ऋतुवां में सूं गुजर्यो है — दुबळो, मोटो, भरेलै मोड़ां वालो, मजबूत, नरम — अर हर दौर में यो वफादार, जींदो अर सुंदर ढंग सूं जवाब देण वालो रह्यो है।

Sapna Jain Chaturvedi ·

अंग्रेजी रै मूल लेख रो अनुवाद AI सूं करियो गयो है। भाव री बारीकियां में फरक हो सकै है। अंग्रेजी रो मूल लेख पढ़ो

Existing Food, Body, and Pride cover showing a plated meal.

म्हैं खाणै सूं प्रेम करूं हूं, अर खाणो म्हां सूं प्रेम करै है। म्हैं आपरे शरीर सूं प्रेम करूं हूं, अर म्हारो शरीर म्हां सूं प्रेम करै है। यो कदे बदल्यो कोनी, कदे बदलसी कोनी, कदे बदल सकै ई कोनी। म्हारो शरीर घणी ऋतुवां में सूं गुजर्यो है — दुबळो, मोटो, भरेलै मोड़ां वालो, मजबूत, नरम — अर हर दौर में यो वफादार, जींदो अर सुंदर ढंग सूं जवाब देण वालो रह्यो है।

म्हैं छः बरस री ही, जद रसोई करणो शुरू करियो। लोगां नै खवावणो उण बखत भी म्हाने भीतर सूं चमका देवतो हो, अर आज भी देवै है। उण आनंद म्हारो व्यक्तित्व घड़्यो। पण जियां-जियां म्हारा बालक मोटा हुया अर आपरो परिवार बढ़्यो, उण ई ढंग सूं शोर भी बढ़्यो — तीन पीढ़ियां, आपस में टकराती पसंदां, अर फैशन सूं भी तेज बदलता खाणै रा फितूर। एक दिन घी जहर हो, बीजै दिन पवित्र। म्हैं उण सब रै साथै चालण री, सगळां नै खुश राखण री कोशिश करी, अर इण फेर में लगभग भूल ई गई कै खाणै रो म्हारे खातर असल मतलब कांई हो।

इण वास्तै म्हैं पढ़्यो — पोषण, जीवविज्ञान, रसायनविज्ञान, धर्म, दर्शन, अठै तक कै भगवद् गीता भी। म्हानै एक बात समझणी ही: यो कियां समझावूं कै आपरा शरीर अर आपरी जिंदगी खुश होवण खातर खाणो खुश होणो जरूरी है। इण सफर में किणी मोड़ पर म्हानै समझ आयो कै खाणो कोई पालन करण रो फॉर्मूलो कोनी, बल्कि मान देण जोग एक भाव है।

एक दोस्त एक बार बोल्यो, “दुनिया में खाणो अर पाणी खतम होवण वालो है। आओ, भोजन री जगह लेण वाळी गोली री फैक्ट्री में पैसा लगावां — थै ई एकली होवेला जो उण लोगां नै जींदा राख सकोला।” उण बात म्हानै झकझोर दियो। क्यूंकै सबसूं तेज दिमाग भी भूल जावै है: मौत कोई विकल्प कोनी, अर आनंद नै पाछै टाळण खातर कोनी बणायो गयो।

यो मनन म्हारो जवाब बण गयो। खाणै नै, शरीर नै, अर साफ समझ, तन-मन रै पोषण अर समझदारी रै भूख्या हर मिनख नै म्हारी प्रेम-पाती। जिण दिन थै कह सको, “म्हैं आपरे शरीर सूं प्रेम करूं हूं, अर म्हारो शरीर म्हां सूं प्रेम करै है। म्हैं खाणै सूं प्रेम करूं हूं, अर खाणो म्हां सूं प्रेम करै है। म्हैं आपरे शरीर नै जो खवावूं हूं, उण सूं प्रेम करूं हूं,” उण दिन थानै इण सुंदर मानवी जीवन रो मायनो समझ में आवै है।

वो शब्द जो आपां सगळां नै जोड़ै है — BODY

“Body।” बस चार अक्षर, फेर भी शायद मानवी भाषा रो सबसूं सगळां पर लागू पड़ण वालो शब्द। शरीर ई एक ऐड़ो सांच है जो हर मिनख में साझो है। एक। सार्वभौम। यो वा एक चीज है जिण सूं आपां सगळा शुरू करां हां अर वा एकली चीज जिण साथै आपरो अंत होवै है। जनम अर मरण रै बीच, यो आपरो अटल साथ है — गहराई सूं निजी, पूरे तौर पर अनूठो, अर सदा मौजूद।

मानव शरीर जींदो रहण खातर बण्यो है। यो अफरा-तफरी, अनदेखी, आघात अर अति हालात रै मुताबिक ढळै है। यो टिकै है। केवल झेलकर फेर उभरण वालो कोनी — असाधारण। एक जींदी व्यवस्था जो एक ई बखत सांस लेवै है, महसूस करै है, टूटै है अर भरै है। कुदरत रो चमत्कार — रूपक में कोनी, बल्कि आपरे काम में।

विडंबना यो है कै जिण पल आपां नै “एक शरीर” कहियो जावै है, कुछ बदल जावै है। शब्द अस्पताल री भाषा ज्यूं लागण लागै है। मौत रै बाद अस्पताल, अधिकारी, अठै तक कै परिवार भी आपरी भाषा बदल देवै है: “शरीर मिल्यो।” “शरीर नै घर ल्यायो जासी।” पण उण शरीर सूं किणी री पहली रुवाई निकळी ही। वो किणी री मां, प्रेमी, दोस्त हो।

आपां somebody (कोई मिनख), everybody (हर मिनख), nobody (कोई मिनख कोनी) ज्यूं शब्दां में इण नै देखां ई कोनी। पण नेड़ै सूं देखो: some‑BODY, every‑BODY, no‑BODY। यो शब्द आपरी बोली में चुपचाप चालतो रहवै है। अर सबसूं निराळी बात, आपां इण रो इस्तेमाल एकताई नै बतावण खातर करां हां: a body of water (जलराशि), a body of work (रचनावां रो संग्रह), a student body (विद्यार्थियां रो समुदाय), a body of knowledge (ज्ञान रो भंडार)। हर बार जद आपां “body” कहां हां, आपां कोई विशाल, जींदी अर जुड़ी हुई चीज नै याद करां हां।

यो शब्द आदर रो हकदार है। यो केवल वो पात्र कोनी जिण में आपां रहवां हां — यो आपरी पहचान है। आपां इण री कियां संभाळ करां हां, इण सूं तय होवै है कै जिंदगी में यो आपरो साथ कियां निभावै अर आपां मरां जद कुदरत में पाछो कियां मिलै। जनम सूं मरण अर फेर धरती में पाछा मिलण रो यो चक्र — गहरो निजी है।

म्हारो शरीर — म्हारो गौरव

म्हारो शरीर केवल एक आकार कोनी है। यो म्हारी नींव है। यो म्हारी सांस, म्हारी यादां, म्हारी हलचल अर म्हारो सांच समेटै है। हर निशान, हर खिंचाव, हर एहसास जींदा बच्या रहण री एक कहाणी है। म्हारो शरीर म्हारे साथै सह्यो है, ढळ्यो है अर बढ़्यो है। यो परिपूर्ण कोनी, पण ताकतवर है। यो बेदाग कोनी, पण म्हारो है।

म्हानै आपरे शरीर पर गौरव है क्यूंकै यो ई वो एकलो घर है जो सच में म्हारो है। जद शब्द साथ छोड़ देवै है, यो बोलै है। यो म्हानै चेतावै है, म्हारी रक्षा करै है अर म्हारे साथै खुशी मनावै है। पीड़ अर सुख में, भूख अर घाव भरावण में, म्हारो शरीर वफादार रहवै है। यो सबसूं पहल्यां जवाब देवै है अर सबसूं आखिर में आराम करै है।

ऐड़ी दुनिया में जो घणी वार शर्म सिखावै है, म्हैं गौरव चुणूं हूं। म्हैं आपरी चमड़ी, आपरे आकार, आपरी लय रो मान राखणो चुणूं हूं। म्हैं अनदेखी री बजाय तन-मन रो पोषण, सुन्नपण री बजाय हलचल, अर नुक्ताचीनी री बजाय देखभाळ चुणूं हूं।

आपरे शरीर सूं प्रेम करणो दिखावटी अभिमान कोनी — यो जिम्मेदारी है। इण रो आदर करणो आपरे लाड लड़ावणो कोनी — यो समझदारी है। म्हारो शरीर म्हां सूं अलग कोनी। यो म्हैं ई हूं। अर म्हानै इण री ली हुई हर सांस, इण री बांधी हर सीमा अर इण रै भीतर बस्या हर सांच पर गौरव है।

आखिरी समझ

खाणो कोई फॉर्मूलो कोनी। शरीर कोई वस्तु कोनी। सागै मिलकर वे जींदा रहण री लय है। दोनूं सूं प्रेम करणो लाड लड़ावणो कोनी — यो साफ समझ है। म्हारो शरीर म्हारो गौरव है। म्हारी शुरुआत, म्हारो बणतो जाणो अर म्हारो आपनापन।

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